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Showing posts from June, 2019
नराकास - वाद विवाद प्रतियोगिता  आज दिनांक 13 जून 2019 को नगर राजभाषा कार्यान्वन समिति , भारत सरकार , गृह मंत्रालय , के तत्वाधान में आयोजित वाद विवाद प्रतियोगिता में अपनी कंपनी का प्रतिनिधित्व करते हुए अपना वक्तव्य रखा गया। यह एक अंतर पब्लिक सेक्टर कारपोरेशन प्रतियोगिता थी , जिसमे NTPC, SAIL, BHEL, IOCL, HPCL, BPCL, ONGC, BEL, TCIL, CWC इत्यादि कम्पनियों के श्रेष्ठतम वक्ताओं ने भाग लिया। आज का मेरा वक्तव्य इस प्रकार है: विषय: कर्म हमेशा भाग्य से बड़ा होता है। " वर्षों तक वन में घूम घूम , बाधा विघ्नों को चूम चूम , सह धूप घाम पानी पत्थर , पांडव आये कुछ और निखर " मैं विकास राजौरा , भेल कॉर्पोरेट आफिस से , आज नराकास के इस आयोजन पर राष्ट्रकवि दिनकर का आह्वाहन करता हूँ , और नमन करता हूँ आदरणीय निर्णायक मंडल को और सभी साथी वक्ताओं को। मैं आज के विषय के पक्ष में बोलने जा रहा हूँ। अपने वक्तव्य का आरंभ मैंने रश्मिरथी के तृतीय संसर्ग से किया है , जहाँ   पांडव महाभारत से युद्ध से पूर्व अपने भाग्य और कर्म के लेखेजोखे की विवेचना कर रहे थे। संदर्भ आज भी प्रासंगिक है , पां...

गर्मी का तांडव

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गर्मी का तांडव ~ व्यंग्य की जुगलबंदी # १४२ अभी अभी डॉ लाल पैथ लैब को अपना रक्त दान करके आ रहा हूँ , और रास्ते भर क्या देखता हूँ , की चील अंडे दे रही है। चील का अंडे देना मेरी नानी के मुहावरों की लंबी फेहरिस्त में से एक था , जिसका प्रयोग वह जेठ के महीने में ही किया करती थी। सड़क का डाम्बर उखड़ने को हो रहा था , की टायर के साथ साथ तुम्हारे घर तक चलेंगे , और बगल में खड़ी काली हौंडा जैज़ आग उगल रही थी। घाम से दग्ध शरीर को कोई ठंडक नहीं मिल रही थी , तो मेरा मन पुरानी यादों की छाँव में जा बैठा। आज ही पता चला कि मेरी यादों की नगरी में भी सेक्टर कटे हुए हैं , और गलियों और चौराहों के बाकायदा नाम भी हैं। बहरहाल मैं सीधे पहुँचा पिन कोड 110065 पर जहाँ कॉलोनी में सभी दो तल्ले मकान ही थे। मैं उसी मकान की छत पर खड़ा था , जो कि हमारी कॉलोनी में कभी सबसे ऊंचा था। कल्पना की उड़ान मुझे उड़ाते हुए ले आयी एक छत पर जहाँ खरहरी खाट पर सफेद चादर बिछी थी। बड़ा आनंद आ रहा था कि , किसी ने मुझे उठा दिया , कि वो तो ताऊजी की खाट है , मेरा बिछोना तो ज़मीन पर लगा है। ज़मीन से पानी के छिड़काव के बाद वाली महक आ रही थी। उस ...

साधक का मोबाइल ~ चीन से

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साधक का मोबाइल ~ चीन से एक समय की बात है , शहर में एक चीनी सौदागर आया था। बहुत सी चीजों के साथ उसके पास एक   बड़ा तिलिस्मी बॉक्स था। चीनी सौदागर कुछ दिन उसी शहर में रुक गया। जैसे जैसे लोगों से व्यवहार बढ़ा , उसका वो बॉक्स लोगों में चर्चा का विषय बन गया। उस बक्से के कौतूहल इसलिए और बढ़ गया क्योंकि जब भी चीनी सौदागर से पूछा जाता , कि यह क्या चीज़ है , तो वह उत्तर देता की खुद इसमें झाँक कर देख लो। कुछ दुःसाहसी लडकों ने हिम्मत करी और उस बड़े से बक्से में झाँक कर देखा। लेकिन एक एक करके सब लड़के ख़ामोश होते चले गए। बहुत पूछने पर भी कुछ न बताया और अकेले रहना पसंद करने लगे। यह लड़के अगर बात भी करते तो बस आपस में ही। अब इस बात की चर्चा ने ज़ोर पकड़ लिया कि यह कोई सौदागर नहीं कोई जादूगर है। जो लड़के बात बात पर शर्त लगते , शरारत करते , जिनके हँसी ठट्ठे से सब गाँव वाले परेशान थे , वो लड़के कैसे एक बार उस बक्से में झाँकने से सन्नाटे में चले गए। विचार किया गया , की इस बक्से के तिलिस्म का तो पता लगाना पड़ेगा। लेकिन बात वहीं आकर रुक जाती , कि बिल्ली के गले में घंटी कौन बांधे। गाँव में कई सूरमाओं को पुक...