साधक का मोबाइल ~ चीन से


साधक का मोबाइल ~ चीन से


एक समय की बात है, शहर में एक चीनी सौदागर आया था। बहुत सी चीजों के साथ उसके पास एक  बड़ा तिलिस्मी बॉक्स था। चीनी सौदागर कुछ दिन उसी शहर में रुक गया। जैसे जैसे लोगों से व्यवहार बढ़ा, उसका वो बॉक्स लोगों में चर्चा का विषय बन गया। उस बक्से के कौतूहल इसलिए और बढ़ गया क्योंकि जब भी चीनी सौदागर से पूछा जाता , कि यह क्या चीज़ है, तो वह उत्तर देता की खुद इसमें झाँक कर देख लो।

कुछ दुःसाहसी लडकों ने हिम्मत करी और उस बड़े से बक्से में झाँक कर देखा। लेकिन एक एक करके सब लड़के ख़ामोश होते चले गए। बहुत पूछने पर भी कुछ न बताया और अकेले रहना पसंद करने लगे। यह लड़के अगर बात भी करते तो बस आपस में ही। अब इस बात की चर्चा ने ज़ोर पकड़ लिया कि यह कोई सौदागर नहीं कोई जादूगर है। जो लड़के बात बात पर शर्त लगते, शरारत करते, जिनके हँसी ठट्ठे से सब गाँव वाले परेशान थे, वो लड़के कैसे एक बार उस बक्से में झाँकने से सन्नाटे में चले गए।विचार किया गया, की इस बक्से के तिलिस्म का तो पता लगाना पड़ेगा। लेकिन बात वहीं आकर रुक जाती, कि बिल्ली के गले में घंटी कौन बांधे। गाँव में कई सूरमाओं को पुकारा गया, लेकिन बड़े बड़े पहलवानों के पाँव उस बक्से के नाम पर उखड़ गए। तब गाँव के किसी चतुर सुजान फूफा ने बोला की गाँव के उस पागल लड़के, मंगलू की सेवाएं ली जाएँ। अब मंगलू को बहला फुसला कर बुलवाया गया और बोला गया कि बक्से में झाँक कर बताओ क्या दिखता है।
इस पूरे प्रकरण में चीनी सौदागर चुपचाप मुँह में दही जमाकर तमाशा देख रहा था। उस सौदागर ने उस पागल मंगलू को भी बक्से के अंदर झाँकने की अनुमति दे दी। लेकिन चंद पलों में वो मंगलू जो किसी को कुछः नहीं कहता था, बहुत जोर से चीखा और सीधे खेतों की तरफ भागा। थोड़ी देर में गाँव वाले देखते हैं, की वो बड़े बड़े पत्थर लेकर बक्से की तरफ बढ़ता चला जा रहा है। मंगलू के मुँह से झाग गिर रहे थे। अब गाँव वालों ने किसी अनर्थ की आशंका से, मंगलू को काबू किया और किसी तरह उसको समझा बुझा कर बैठाया। अब भी गाँव के वो लड़के मौन थे, और चीनी सौदागर अपनी चिर परिचित मुस्कान बिखेर रहा था।
समस्या और भी ज़्यादा गहराती जा रही थी। गाँव के सरपंच को समझ नहीं आ रहा था कि करे तो करे क्या। भगवान की शरण को अंतिम आशा जान कर जब सरपंच मंदिर की ओर बढ़ा। उसे मंदिर की तरफ जाते एक साधु महाराज मिले। सरपंच ने इसे शुभ संकेत समझा, और साधु बाबा को पूरी व्यथा बताई। साधु बाबा, झटपट ही जान कल्याण के लिए, बक्से में झाँकने को राज़ी हो गए। साधु महाराज को चीनी सौदागर के पास लाया गया, और बक्से में झाँकने का प्रबंध किया गया। लेकिन जैसे ही साधु महाराज ने अपना मुँह उस बक्से के बाहर निकाला और कुछ बोल पाते, उससे पहले ही उनकी आँखें ऊपर की ओर  चढ़ गई। अब साधु महाराज मूर्छा में जाते जाते पूरे बेसुध हो गए। गाँव वाले अब और भी चिंता में डूब गए।
साधु महाराज की हालत तो अब और भी खराब थी। नब्ज़ नाड़ी एक दम गायब। दिल की धड़कन न के बराबर, लेकिन चेहरे पे पूरा तेज। चेहरे पर पानी की छींटे मारी गयी, पर के तलवे रगड़े गए, बड़ी देर बाद साधु बाबा होश में आये। तब भी साधु बाबा की स्थिति बोलने सुनने की नहीं थी। बाबा के लिए चाय बुलवाई गयी, चिलम जोड़ी गयी। धीरे धीरे बाबा की स्थिति सुधरी। अब सब गाँव वाले बाबा को घेर कर बैठ गए। सबकी आंखों में एक ही सवाल, की बक्से में देखा क्या?
साधु बाबा की पहुँचे हुए बाबा थे। गाँव वालों को बताया कि उस बक्से में कुछ नहीं है, सिर्फ कुछ आईने लगे हैं, जिसमे आपको अपनी भावनाओं और दबी हुई उत्कंठाओं का प्रतिबिंब दिखता है। गाँव वालों को कुछ समझ नहीं आ रहा था, तब सरपंच ने साधु बाबा को अब तक का पूरा विवरण बताया। इस पर साधु बाबा ने कहा, कि उन लड़कों को वो दिख गया जो वो देखना चाह रहे थे, और उन्हें इस गाँव में नहीं दिख रहा था। और उस पागल को अपने जैसा ही पागल दिखाई दिया, जिससे निबटने के लिए वह खेतों की तरफ से पत्थर उठा लाया। सरपंच ने हिम्मत करके पूछा, बाबा आपको क्या दिखा? इसका जवाब साधु बाबा ने दिया, कि मुझे इस बक्से में उस अनंत के दर्शन हुए, जिसके लिए मैं मंदिर मंदिर नगर नगर घूम रहा हूँ। अब सरपंच की समझ में कुछ कुछ आ रहा था।
लेकिन अब तक के प्रकरण को देख कर सरपंच के मन में एक गाँठ बन गयी थी, कि यह चीनी सौदागर जल्द ही टलने वाला नहीं लगता। अब आगे यह और  क्या क्या करतब दिखायेगा, और इससे किस तरह निबट जाए? साधु बाबा ने प्रवचन की मुद्रा में सब गाँव वालों को संबोधित किया और कहा कि आने वाले सन 2019 तक यह बक्सा, बहुत छोटा रूप धर के, सबके जेबों में घुस जाएगा। उस समय, इस बक्से के नाम मोबाइल फ़ोन रहेगा, और इसके अंदर उभरती हुई छवियों को सोशल मीडिया कहा जायेगा। लेकिन किसी भी देश किसी भी काल में नियम यही रहेगा, कि इस बक्से को जब भी आप खाली बैठे बहुत देर तक निहारोगे, तब इसमें आपको आपकी दबी हुई मंशाओं के अनुसार छवियाँ दिखने लगेंगी। जवान लड़कों को अपनी रुचिकर छवियाँ देखेंगी, पागल व्यक्ति इसे पाकर और भी पागल हो जाएगा, और अगर कोई प्रभु की इस कृपा का उपासक है, तो उसको साक्षात्कार तुरंत उपलब्ध हो जाएगा। यह बक्सा आपके जीवन का अभिन्न अंग बन जायेगा, लेकिन अपनी भावनाओं पर नियंत्रण आपको स्वयं करना होगा।
@विकास राजौरा....


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